NDvsNZ: फिरोजशाह कोटला ODI जीतेगा भारत, ये रहे 7 कारण

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जीतेगी टीम इंडिया ये रहे सात कारण

भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज का दूसरा मैच दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर गुरुवार को खेला जाना है। सीरीज में टीम इंडिया 1-0 से आगे और अपनी बढ़त को मजबूत करने के इरादे से उतरेगी वहीं कीवी टीम बराबरी के लिए सबकुछ दांव पर लगाने को तैयार है। टीम इंडिया के हेड कोच अनिल कुंबले ने इसी मैदान पर परफेक्ट 10 का कारनामा किया था जबकि टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान और स्टार बल्लेबाज विराट कोहली का यह होम ग्राउंड है।

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1 कोच कुंबले का फेवरेट है फिरोजशाह कोटला मैदान

भारत के लिए फिरोजशाह कोटला हमेशा से भाग्यशाली रहा है। कुंबले का यह पसंदीदा मैदान है। वहीं कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने राष्ट्रीय ही नहीं अपनी आईपीएल टीमों की कप्तानी करते हुए भी अधिकतर यहां जीत दर्ज की है जबकि कोहली ने इसी मैदान से अपने करियर की स्वर्णिम शुरुआत की थी। भारत ने पिछले 11 साल से यहां कोई मैच नहीं गंवाया और वर्तमान परिस्थितियों में जिस तरह से वह टेस्ट से लेकर पहले वनडे तक कीवी टीम पर हावी है उससे धौनी एंड कंपनी के लिए कोटला एक और शानदार जीत का गवाह बन सकता है।

टेस्ट सीरीज में कीवियों का 3-0 से क्लीन स्वीप करने के बाद भारत ने धर्मशाला में पहले वनडे में भी एकतरफा जीत दर्ज की थी। अगले साल इंग्लैंड में होने वाली चैंपियन्स ट्रॉफी को ध्यान में रखकर इस सीरीज में उतरी टीम इंडिया के हौसले बुलंद हैं लेकिन खिलाड़ियों में कभी किसी को कम नहीं आंकने की नयी सोच से यह तय है कि वे इस मैच में भी किसी तरह की कमी नहीं छोड़ेंगे।

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2 इस बार बदला होगा कोटला पिच का मिजाज

कोटला की पिच अमूमन धीमी और स्पिनरों की मददगार मानी जाती रही है लेकिन इस बार दावा किया है कि उसमें तेजी और उछाल होगी। स्वाभाविक है ऐसे में अगर तेज गेंदबाजों को कुछ मदद मिलेगी तो कोहली, रोहित शर्मा और अजिंक्य रहाणे जैसे स्ट्रोक प्लेयर इसे पसंद भी करेंगे। अगर पिच ने दावों के मुताबिक प्रदर्शन किया तो दर्शकों को एक रोमांचक मैच देखने को मिल सकता है। इस सीरीज के लिए टीम में वापसी करने वाले सुरेश रैना अभी वायरल बुखार से पूरी तरह नहीं उबरे हैं और इसलिए वह दूसरे वनडे में भी नहीं खेलेंगे।

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3 टीम कॉम्बिनेशन पर है धौनी की नजर

धौनी चैंपियन्स ट्रॉफी को ध्यान में रखकर टीम कॉम्बिनेशन तैयार कर रहे हैं लेकिन वह विजेता टीम से छेड़छाड़ करने के पक्ष में नहीं रहे हैं और इसलिए सभी खिलाड़ियों के फिट रहने की स्थिति में लगता नहीं कि इस मैच के लिए टीम में कोई बदलाव होगा। अगर पिच में उछाल रहती है तो उमेश यादव के साथ गेंदबाजी का आगाज करने वाले हार्दिक पंड्या अपनी गेंदबाजी से धर्मशाला की तरह केन विलियमसन और उनके साथियों को परेशान कर सकते हैं। जसप्रीत बुमराह किसी भी परिस्थिति में अच्छा प्रदर्शन करने में माहिर हैं जबकि स्पिन विभाग के अगुआ अमित मिश्रा को हमेशा कोटला पसंद आया है।

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4 कोहली का होमग्राउंड

अगर पिच अपने पुराने मिजाज पर लौट आती है तो फिर अक्षर पटेल और कामचलाऊ स्पिनर केदार जाधव को बड़ी जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। कोहली ने कोटला में टेस्ट और वनडे में मिलाकर अब तक आठ पारियां खेली हैं लेकिन उनके नाम पर केवल एक सेंचुरी ही दर्ज है जो उन्होंने 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ (नॉटआउट 112 रन) बनाया था। अपनी अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में बदलने में माहिर इस स्टार बल्लेबाज पर मध्यक्रम की बड़ी जिम्मेदारी है लेकिन कप्तान धौनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है जो बड़ा स्कोर बनाने के लिए आतुर हैं।

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5 फिर से फिनिशर बनने को तैयार धौनी

धौनी ने धर्मशाला में यह जाहिर कर दिया था कि वह फिर से फिनिशर की अपनी भूमिका में उतरना चाहते हैं। पहले मैच में वह 21 रन बनाकर रन आउट हो गए लेकिन अगर यहां उनको मौका मिलता है तो फिर दिल्ली के दर्शकों को उनका पुराना रूप देखने को मिलेगा। टीम इंडिया में एक एक स्थान के लिए दिख रही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के बीच मनीष पांडे मध्यक्रम में अपनी जगह सुरक्षित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध दिखते हैं जबकि जाधव भी रैना के लिए प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने का रास्ता आसान करने के मूड में नहीं होंगे। रैना को उनकी गेंदबाजी को भी ध्यान में रखकर टीम में लिया गया था और जाधव ने उनकी अनुपस्थिति में धर्मशाला में यह भूमिका अच्छी तरह से निभायी थी।

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6 कीवी बल्लेबाज हो रहे हैं फेल

न्यूजीलैंड की टीम की बात करें तो उसके खिलाड़ी टेस्ट और पहले वनडे की हार के बाद काफी दबाव में हैं। उनकी बल्लेबाजी और आसानी से विकेट गंवाने की प्रवृत्ति देखकर लगता है कि वे मैदान पर अपना बेस्ट प्रदर्शन करने के लिए मानसिक तौर पर मजबूत नहीं हैं। कप्तान विलियमसन भी कोहली के टक्कर के बल्लेबाज हैं लेकिन अब इस दौरे में वह अपने बल्ले का जलवा दिखाने में नाकाम रहे हैं। मार्टिन गप्टिल और रोस टेलर जैसे अनुभवी बल्लेबाजों की लगातार असफलता से भी न्यूजीलैंड पर दबाव बना है जबकि ल्यूक रोंकी टुकड़ों में अच्छा प्रदर्शन कर पाए हैं।

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7 गेंदबाजों में भी नहीं दिख रही है ‘धार’

कोरी एंडरसन और जेम्स नीशाम जैसे अच्छे ऑलराउंडर टीम में संतुलन पैदा करते हैं। न्यूजीलैंड टीम प्रबंधन उम्मीद कर रहा होगा कि उसके बाकी खिलाड़ी सलामी बल्लेबाज टॉम लाथम से प्रेरणा लेंगे जिन्होंने पहले वनडे में एक तरफ से विकेट झड़ने के बावजूद दूसरे छोर पर सहजता से बल्लेबाजी और आखिर तक नाबाद रहे। टिम साउथी और डग ब्रेसवेल अनुकूल परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं जबकि स्पिनर ईश सोढ़ी और मिशेल सैंटनर को अब नहीं सूझ रहा है कि स्पिनरों को खेलने में पारंगत भारतीय बल्लेबाजों पर कैसे शिकंजा कसा जाए।

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टीम इस प्रकार हैं

भारत- महेंद्र सिंह धौनी (कप्तान), रोहित शर्मा, अंजिक्य रहाणे, मनीष पांडे, केदार जाधव, हार्दिक पंडया, अमित मिश्रा, अक्षर पटेल, उमेश यादव, धवल कुलकर्णी, जयंत यादव और मनदीप सिंह में से।

न्यूजीलैंड- केन विलियमसन (कप्तान), टॉम लाथम, मार्टिन गप्टिल, रोस टेलर, ल्यूक रोंकी, मिशेल सैंटनर, ईश सोढी, जिम्मी नीशाम, कोरी एंडरसन, ट्रेंट बोल्ट, टिम साउथी, एंटन डेविच, डग ब्रेसवेल, मैट हेनरी और बीजे वाटलिंग में से।

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